कोटा में दो-तीन किलोमीटर लंबे बड़े टिड्डी दल का हमला
Kotatimes
Updated 5 years ago
KOTATIMES JUNE 23,2020। शहर में सोमवार को शाम करीब 5:15 बजे कैथून की ओर से रायपुरा में 3 किलोमीटर लंबा और एक डेढ़ किलो मीटर चौड़ा टिड्डी दल प्रवेश कर गया। टिड्डी दल रायपुरा से लेकर डीसीएम रोडवेज बस स्टैंड तक छावनी रामचंद्रपुरा में भी घुस गया। इसी दौरान तेज हवा के साथ बारिश शुरू हो गई इस कारण टिड्डी दल तितर-बितर हो गया।
इससे पहले भी 29 मई को टिड्डी दल का प्रवेश कोटा मे हुआ था तब दशहरा ग्राउंड क्षेत्र में 2 से 3 किलोमीटर लंबा टिड्डी दल निकला इस क्षेत्र को टिड्डी दल ने घेर लिया|

तब टिडडी अटैक को लेकर यूडीएच मंत्री शांति धारीवाल ने कोटा प्रशासन को किया अलर्ट
कोटा जिले में हुए टिडिडयों के अटैक को लेकर राजस्थान सरकार के स्वायत शासन मंत्री शांति धारीवाल ने जिला प्रशासन को अलर्ट रहने के सख्त आदेश जारी किए थे।
मंत्री धारीवाल ने कहा था कि टिडडी दल पर जिला प्रशासन और कृषि विभाग मिलकर प्रभावी नियंत्रण की कार्रवाई करने के लिए मुस्तैद रहे। टिडिडयां क्षेत्र के किसानों की सब्जियों की फसलों को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाए। ऐसे में जिला प्रशासन मानव संसाधन के साथ टिडडी दल नियंत्रण के लिए मशीनी उपकरणों का बंदोबस्त 24घंटे के लिए आगामी दिनों के लिए रखें। कोटा में गत शुक्रवार को टिडिडयों के एक बडे दल ने कोटा जिले में प्रवेश करते हुए कोटा शहर के अंदर अटैक किया था।इसके बाद शुक्रवार रात को मंत्री शांति धारीवाल के निर्देश पर जिला कलेक्टर औरकृषि विस्तार विभाग के संयुक्त निदेशक डॉ. रामावतार के निर्देशन में 3 दमकलों और 5 ट्रेक्टर पावर स्प्रे मशीनों से टिडिडयों के दल पर दवा का छिडकाव किया गया।और उन्हें नियंत्रित करते हुए टिडिडयों को आज जिले की सीमा से बाहर निकालने में सफल रहा। मंत्री शांतिधारीवाल ने कहा कि कलेक्टर जिले में टिडडी नियंत्रण के लिए बनाई कमेटियों और कृषि पर्यवेक्षकों के कार्यों की नियमित समीक्षा करें। किसानों को टिडडी नियंत्रण के लिए जागरूक करें, ट्रैक्टर पावर मशीनों को किसान तैयार रखें, और जब र्कोइ नया टिडडी दल जिले मे आए तो उसका समय पर रोकथाम करते हुए उसे नियंत्रित करें।
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जानिए टिड्डी के बारे में :
संपूर्ण संसार में इसकी केवल छह जातियाँ पाई जाती हैं। यह प्रवासी कीट है और इसकी उड़ान दो हजार मील तक पाई गई है।
प्रवासी टिड्डियों की निम्नलिखित प्रमुख जातियाँ हैं :
1. उत्तरी अमरीका की रॉकी पर्वत की टिड्डी
2. स्किस टोसरका ग्रिग्ररिया (Schistocerca gregaria) नामक मरुभूमीय टिड्डी,
3. दक्षिण अफ्रीका की भूरी एवं लाल लोकस्टान पारडालिना (Locustana pardalina) तथा नौमेडैक्रिस सेंप्टेमफैसिऐटा (Nomadacris semptemfaciata),
4. साउथ अमरीकाना (South Americana) और
5. इटालीय तथा मोरोक्को टिड्डी। इनमें से अधिकांश अफ्रीका, ईस्ट इंडीज, उष्ण कटिबंधीय आस्ट्रेलिया, यूरेशियाई टाइगा जंगल के दक्षिण के घास के मैदान तथा न्यूजीलैंड में पाई जाती हैं।
मादा टिड्डी मिट्टी में कोष्ठ (cells) बनाकर, प्रत्येक कोष्ठ में 20 से लेकर 100 अंडे तक रखती है। गरम जलवायु में 10 से लेकर 20 दिन तक में अंडे फूट जाते हैं, लेकिन उत्तरी अक्षांश के स्थानों में अंडे जाड़े भर प्रसुप्त रहते हैं। शिशु टिड्डी के पंख नहीं होते तथा अन्य बातों में यह वयस्क टिड्डी के समान होती है। शिशु टिड्डी का भोजन वनस्पति है और ये पाँच छह सप्ताह में वयस्क हो जाती है। इस अवधि में चार से छह बार तक इसकी त्वचा बदलती है। वयस्क टिड्डियों में 10 से लेकर 30 दिनों तक में प्रौढ़ता आ जाती है और तब वे अंडे देती हैं। कुछ जातियों में यह काम कई महीनों में होता है। टिड्डी का विकास आर्द्रता ओर ताप पर अत्याधिक निर्भर करता है। टिड्डी के वृत्तखंडधारी पैरों के तीन जोड़ों में से सबसे पिछला जोड़ा अधिक परिवर्धित होता है। ये दो पैर सबसे लंबे और मजबूत होते हैं। कठोर, संकुचित पंख संम्पुटों के नीचे चौड़े पंख होते हैं। टिड्डियों की दो अवस्थाएँ होती हैं, 1. इकचारी तथा 2. यूथचारी।
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निवास
इनके निवास स्थान उन स्थानों पर बनते हैं जहाँ जलवायु असंतुलित होता है और निवास के स्थान सीमित होते हैं। इन स्थानों पर रहने से अनुकूल ऋतु इनकी सीमित संख्या को संलग्न क्षेत्रों में फैलाने में सहायक होती है। प्रवासी टिड्डी के उद्भेद (outbreak) स्थल चार प्रकार के होते हैं:
1. कैस्पियन सागर, ऐरेल सागर तथा बालकश झील में गिरनेवाली नदियों के बालू से घिरे डेल्टा,
2. मरूभूमि से संलग्न घास के मैदान, जहाँ वर्षण में बहुत अधिक विषमता रहती है, जिसके कारण टिड्डियों के निवास स्थान में परिवर्तन होते रहते हैं;
3. मध्य रूस के शुष्क तथा गरम मिट्टी वाले द्वीप, जो टिड्डी के लिए नम और अत्यधिक ठंडे रहते हैं। इस क्षेत्र में तभी बहुत संख्या में टिड्डियाँ एकत्र होती हैं जब अधिक गर्मी पड़ती है तथा
4. फिलिपीन के अनुपयुक्त, आर्द्र तथा उष्ण कटिबंधीय जंगलों को समय समय पर जलाने से बने घास के मैदान।
वयस्क यूथचारी टिड्डियाँ गरम दिनों में झुंडों में उड़ा करती हैं। उड़ने के कारण पेशियाँ सक्रिय होती हैं, जिससे उनके शरीर का ताप बढ़ जाता है। वर्षा तथा जाड़े के दिनों में इनकी उड़ानें बंद रहती हैं। मरुभूमि टिड्डियों के झुंड, ग्रीष्म मानसून के समय, अफ्रीका से भारत आते हैं और पतझड़ के समय ईरान और अरब देशों की ओर चले जाते हैं। इसके बाद ये सोवियत एशिया, सिरिया, मिस्र और इजरायल में फैल जाते हैं। इनमें से कुछ भारत और अफ्रीका लौट आते हें, जहाँ दूसरी मानसूनी वर्ष के समय प्रजनन होता है।
टिड्डी नियंत्रण
टिड्डियों का उपद्रव आरंभ हो जाने के पश्चात् इसे नियंत्रित करना कठिन हो जाता है। इस पर नियंत्रण पाने के लिए हवाई जहाज से विषैली ओषधियों का छिड़काव, विषैला चारा, जैसे बैन्जीन हेक्साक्लोराइड के विलयन में भीगी हुई गेहूँ की भूसी का फैलाव इत्यादि उपयोगी होता है।
टिड्डी के बारे मे रोचक तथ्य :
कुवैत मे लोगों के बीच टिड्डी से बने व्यंजनों ने धूम मचा रखी है।

कुछ लोग सिंके हुए टिड्डे का लुत्फ उठाना पसंद करते हैं तो कुछ को टिड्डे के सूखे हुए व्यंजन (ड्राई) पसंद हैं। पेशे से पत्रकार मूदी अल मिफ्ताह (64) ने कहा, ''मुझे टिड्डे से बने व्यंजन बेहद पसंद हैं। यह मेरी बचपन की यादों से जुड़े हैं और मुझे मेरे दादा-दादी और पिता की याद दिलाते हैं।'' मिफ्ताह हर साल टिड्डों के बाजार में आने का इंतजार करती हैं और खुद ही उन्हें पकाती हैं। उनको टिड्डियों के करारा व्यंजन पसंद हैं। हालांकि मिफ्ताह बताती हैं कि उनके कई परिचित काफी पहले ही टिड्डे या अन्य कीट खाने छोड़ चुके हैं। लेकिन कुवैत में टिड्डी की खपत घट रही है, खासकर युवा पीढ़ी के बीच। किराने का सामान खरीदने आए अली साद (20) भी टिड्डी या अन्य कीट खाना पसंद नहीं करते।

वह कहते हैं, ''मैंने कभी भी टिड्डी खाने के बारे में नहीं सोचा। जब हमारे पास खाने के लिये हर तरह का मांस है, तो मैं कीट क्यों खाऊं?'' टिड्डियां दुनिया के कई हिस्सों में खाई जाती हैं और यह कुछ व्यंजनों का एक मुख्य स्रोत भी हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि वे प्रोटीन का एक उत्कृष्ट स्रोत है। कुवैत में बुजुर्ग लोगों के बीच अब भी यह व्यंजन खासे लोकप्रिय हैं। अबू महमूद (63) आमतौर पर मछलियां बेचते हैं, लेकिन जब सीजन आता है तो वह टिड्डी और कवक बेचना शुरू कर देते हैं। महमूद ने कहा कि "सर्दियों की रातों के दौरान टिड्डियों को पकड़ा जाता है (जब वे उड़ नहीं रहे होते हैं) और हम उन्हें सऊदी अरब से आयात करते हैं।" उन्होंने कहा कि मैं जनवरी से अप्रैल के बीच चलने वाले सीजन में टिड्डियों की लगभग 500 थैलियां बेच देता हूं। एक थैली का वजन आमतौर पर 250 ग्राम होता है।
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