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वल्लभ पंथ के सप्त उपपीठों में प्रथम स्थान कोटा के मथुरेश जी का, कोटा के पाटनपोल में भगवान मथुराधीश जी का मंदिर

Kotatimes

Updated 6 years ago

KOTATIMES AUGUST 12, 2020। कोटा में पाटनपोल क्षेत्र में प्रथमेश मथुराधीश बिराजते हैं, जो कोटा में छोटी काशी बूंदी से यहां आए। महाराव दुर्जनसाल हाड़ा बूंदी से लेकर आए। मथुराधीश जी की प्रतिमा भगवान श्रीकृष्ण के वल्लभमय सप्त स्वरूपों में से प्रथमेश है। इसी कारण कोटा के इस मथुराधीश मंदिर को वल्लभसम्प्रदाय की प्रथम पीठ मानी जाती है और और वल्लभकुल सम्प्रदाय के अनुयायियों के लिए महत्वपूर्ण व प्रथम तीर्थ है। यहाँ मथुरेश जी की सेवा वल्लभ सम्प्रदाय की परम्परा के अनुरूप की जाती है। वर्ष भर इस सम्प्रदाय के अनुसार उत्सवों का आयोजन होता है। यहाँ आयोजित प्रमुख उत्सवों में कृष्णजन्माष्टमी, नन्दमहोत्सव, अन्नकूट तथा होली का उत्सव प्रमुख है।

शिक्षा नगरी कोटा सिर्फ शिक्षा का ही नहीं, धर्मप्रेमियों के लिए धर्म नगरी भी है। लेकिन इस वर्ष कोरोना संक्रमण का भी असर कृष्ण जन्माष्टमी पर दिखेगा।

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सरकार की गाइडलाइन के तहत गत दिनों से मंदिरों के बंद होने के कारण पर्व को परम्पराओं के तहत ही आयोजन हो रहे हैं। कोरोना को देखते हुए श्रद्धालुओं के लिए मंदिर के कपाट बंद रहेंगे। 
 
सन 1729 विक्रमी के समय मुग़ल शासक औरंगजेब के मंदिर तोड़ों अभियान के कारण बज्रभूमि के सभी स्वरुप रवाना होकर हिन्दू राजाओं के राज्य में चले आये । अतः श्री मथुराधीश के प्रभु जी संवत 1727 में हाड़ा राजाओं के राज्य बूंदी शहर में पधारे और बूंदी शहर के बालचंद पाडा मोहल्ले में करीब 65 वर्ष विराजे ।
 
श्री मथुराधीश प्रभु का प्राकट्य मथुरा जिले के ग्राम करणावल में फाल्गुन शुक्ल एकादशी संवत 1559 विक्रमी के दिन संध्या के समय हुआ था| संवत 1795 में कोटा के महाराज दुर्जनशाल जी ने प्रभु को कोटा पधराया, कोटा नगर में पाटन पोल द्वार के पास प्रभु का रथ रुक गया तो तत्कालीन आचार्य गोस्वामी श्री गोपीनाथ जी ने आज्ञा दी कि प्रभु की यहीं विराजने की इच्छा है, तब कोटा राज्य के दीवान द्वारकादास जी ने अपनी हवेली को गोस्वामी जी के सुपुर्द कर दी। गोस्वामी जी ने उसी हवेली में कुछ फेर बदल कराकर प्रभु को विराजमान किया तब से अभी तक इसी हवेली में विराजमान है। यहाँ वल्लभ कुल सम्प्रदाय की रीत के अनुसार सेवा होती है ।
प्रथमपीठ युवराज श्रीमिलन गोस्वामी जी की आज्ञा से " गृहे स्थित्वा स्वधर्मत:" घर में ही स्वधर्माचरण पूर्वक भगवत्सेवा करें, पुष्टिसम्प्रदाय के संस्थापक श्रीवल्लभाचार्यचरण की आज्ञा है "कृष्ण सेवा सदा कार्या"(सिद्धान्तमुक्तावली) श्रीकृष्ण की सेवा सदा करें,अतः आज के विकट स्थिति को देखते हुए पुष्टिभक्त को घर में ही रह कर अपना स्वधर्म केवल कृष्ण सेवा करना यह परम कर्तव्य बन गया है। श्रीवल्लभाचार्य कहते हैं कि कोरोना जैसी विकट स्थिति में मंदिरों को बंद करने का सरकार द्वारा फैसला सही लिया गया है। लोगो ने व्रत उपवास रखे हैं। अब रात को जन्म पर ठाकुरजी को पंचामृत स्नान करवाया जाएगा। श्रीवल्लभाचार्य कहते हैं कि श्री कृष्ण का प्राकट्य रात 12:00 बजे हुआ। इसलिए टिपटा-पाटनपोल स्थित फूल बिहारी मथुराधीशजी समेत अन्य मंदिरों में परम्परागत ढंग से कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जा रही है। गुरुवार को नंदोत्सव मनाया जाएगा। जानकारी के अनुसार भगवान मथुराधीश जी का प्राकट्य कुंज एकादशी को करणावल ग्राम मथुरा में हुआ तब मथुराधीश जी का स्वरूप सातताड के पेड़ के बराबर लंबा था और महाप्रभु जी को सेवा करने की आज्ञा दी। तब प्रभु जी ने कहा इतने लंबे स्वरूप की सेवा करना साधारण मनुष्य के सामर्थ्य में नहीं है ऐसे में महाप्रभु जी के आग्रह पर 28 अंगुल का स्वरूप धारण किया और मथुराधीश जी का यही स्वरूप कोटा में विराजमान है जो दुनिया मे पुष्टीमार्ग की प्रथम पीठ है

कृष्ण जन्मोत्सव पर मंदिरों में झांकियां तैयार, हो रहा लड्डू गोपाल का इंतजार

बजाज खाना स्थित मां शीला देवी मंदिर के संचालक अमित सूद ने बताया कि कृष्ण जन्मोत्सव हर वर्ष पूरे देश में हर्षोल्लास से मनाया जाता है पर इस वर्ष कोरोना संकटकाल के कारण मंदिरों में दर्शनार्थियों का जाना बंद है पर मंदिरों के संचालकों के द्वारा भगवान कृष्ण के स्वागत की सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई है ऐसे में बजाज खाना स्थित मां शीला देवी मंदिर में भी कृष्ण जन्मोत्सव पर श्री कृष्ण के आगमन हेतू सभी तैयारियां पूर्ण कर ली गई हैं जिनमें भगवान श्री कृष्ण की झांकी उनके लिए पालकी झूला एवं भोग शामिल है  रात 12:00 बजे भगवान श्री कृष्ण के जन्म पर लड्डू गोपाल को पंचामृत से स्नान कराकर झूले में बैठाया जाएगा और माखन मिश्री और गिरी का भोग लगाया जाएगा झांकी दर्शन के लाभ सोशल मीडिया के माध्यम से दर्शनार्थियों को मिल सकेगा क्योंकि कोरोना संक्रमण से सुरक्षित रहने के लिए सभी घर पर रहे और सुरक्षित रहे भीड़ वाली जगह पर जाने से बचें ।


कोटा में आस्था से मनाया गया जन्माष्टमी का पर्व                                                                               

शहर में जन्माष्टमी का पर्व आस्था के साथ मनाया गया। घरों और मंदिरों के अंदर भगवान श्री कृष्ण का प्रकाशोत्सव के साथ ही अभिषेक किया गया। योगेश्वर भगवन श्री कृष्ण जी के प्राकटयोत्सव के पावन दिवस का पर्व नगर निगम के पूर्व पार्षद विवेक राजवंशी द्वारा तलवंडी सेक्टर 3 पवनधाम पार्क स्थित साँवलिया सेठ मंदिर में साँवलिया जी का पंचामृत अभिषेक भोग व आरती पूजन कर उल्लासपूर्वक मनाया गया।

इस अवसर पर सदैव की भांति पूर्व पार्षद गोपालराम मंडा,दीपेश गुप्ता,कैलाश मंगल,ताराचंद खत्री व् अन्य धर्मप्रेमी एवं भक्तजनों की मौजूदगी रही,आरती के दौरान सभी भक्तजनों द्वारा मौजूदा समय में फैली वैश्विक महामारी कोरोना संक्रमण से जल्द मुक्ति दिलाने की प्रार्थना की गयी। किशोरपुरा स्थित प्राचीन पदमनाथ मंदिर पर भगवान कृष्ण की भव्य झांकी बनाई गई। मंदिर के अध्यक्ष मन्नालाल गुर्जर ने बताया कि इस प्राचीन मंदिर पर हर वर्ष कृष्ण जन्माष्टमी मनाई जाती है। मंदिर पर आस-पास के सभी लोग झांकी देखने आते है लेकिन इस वर्ष कोरोना महामारी के फैलने के कारण मंदिरो पर बड़े आयोजन की मनाही है।

श्रीनाथपुरम स्थित माहेश्वरी पब्लिक स्कूल मे बुधवार को कृष्ण जन्मोत्सव कोविड-19 को ध्यान में रखते हुऐ नियमानुसार मनाया गया। इस अवसर पर स्कूल के अध्यक्ष राजेशकृष्ण बिरला, उपाध्यक्ष नन्द किशोर काल्या, मंत्री बिठ्ठल दास मूंदड़ा, प्रशासक राजेन्द्र कुमार जैन एवं स्कूल के प्राचार्य अमित कुमार शर्मा उपस्थित रहे।इस अवसर पर स्कूल के द्वारा वर्चुवल,आनलाइन फैन्सी ड्रेस प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। बाल भवन के नन्हें-मुन्नें बच्चों ने कृष्ण एवं राधा का मनमोहक श्रृंगार एवं वेशभूषा धारण कर मानो विद्यालय को बाल कृष्ण की लीलाओं से सरोकार कर दिया। बच्चों द्वारा भेजी कृष्ण लीलाओं की मनमोहक प्रस्तुतियोें ने सभी का मन मोह लिया।स्कूल के प्राचार्य ने विजेता रहे छात्र-छात्राओं को ई-सर्टिफिकेट देकर पुरस्कृत किया।   

 

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